Thursday, July 23, 2015

हमसफ़र !!

हम बैठे हैं यहाँ, हमारे दुःखोंको गिनाते हुए ,
तू अकेले  कैसे जी रहा हैं वहा, जहा तेरे दुःख अनगिनत हैं ।

सलाम, हैं तुझे ये मेरे दोस्त !!

तू हर एक जिंदगी में चिराग जलाता गया,
हम वह भी ना कर पाए हातो मैं मशाल लेकर । 



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